परेश रावल और ताजमहल: इतिहास या विवाद?
हाल ही में रिलीज हुई एक नई फिल्म, "द ताज स्टोरी", चर्चा में आ गई है। फिल्म का ट्रेलर और पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कुछ बहस हुई। पोस्टर में अभिनेता परेश रावल एक भगवान शिव की मूर्ति और ताजमहल की छत हटाते हुए दिखाई देते हैं। “क्या वास्तव में शाहजहाँ ने ताजमहल बनाया?” पोस्टर में पूछा। ”
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| The Taj story का पोस्टर (फोटो का) |
• पोस्टर को लेके सोशल मीडिया पर लोगों में गुस्सा है
कुछ लोग इस पोस्टर से नाराज़ हो गए और क्रोधित हो गए। फिल्म के निर्माता और परेश रावल ने विवाद बढ़ते देखते हुए पोस्टर को तुरंत हटा दिया और कहा कि इसका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं था। उनका कहना था कि धर्म नहीं, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित कहानी है।
• परेश रावल ने कहा कि,
एक इंटरव्यू में परेश रावल ने कहा कि उनका किरदार ताजमहल की असली कहानी जानने के लिए बहादुर है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ताजमहल का डीएनए टेस्ट होना चाहिए, ताकि पता चल सके कि यह स्मारक हिंदू मंदिर था या मुस्लिम स्मारक था। यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन उन्होंने इसे खुलकर कहा, जिससे सोशल मीडिया पर बहुत चर्चा हुई।
• फिल्म के निर्देशक ने बताया कि
फिल्म के निर्देशक तुषार गोयल ने कहा कि यह सिर्फ एक कहानी नहीं है। लंबे समय से लोगों ने यह संवाद नहीं सुना था। ट्रेलर में केवल एक छोटा सा भाग दिखाया गया है, और पूरी फिल्म में बहुत कुछ बताया जाएगा।
• फिल्म रिलीज होने की तारीख
तुषार अमरीश गोयल द्वारा निर्देशित फिल्म “द ताज स्टोरी” 31 अक्टूबर से रिलीज़ होगी। फिल्म में प्रमुख भूमिकाओं में ज़ाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, स्नेहा वाघ और नमित दास भी हैं।
• ब्लॉग लेखक का विचार
ताजमहल का इतिहास हमेशा से लोगों को रहस्यमय रहा है। यह बहस केवल इतिहास से देखनी चाहिए, चाहे वह मुस्लिम स्मारक हो या किसी पुराने मंदिर पर बनाया गया हो। पोस्टरों या फिल्मों के माध्यम से इतिहास पर सवाल उठाना विचार-विमर्श को जन्म देता है, और यही असली उद्देश्य कला और सिनेमा का होना चाहिए।

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