RSS के नागपुर में मार्च का वीडियो शेयर किया, जिसमें झूठे दावे थे

आरएसएस के मार्च का जो वीडियो वायरल हो रहा है, उस पर फैल रहा दावा सही नहीं है। ये वीडियो करीब छह महीने पुराना है और महाराष्ट्र का है, न कि कर्नाटक का।

"RSS स्वयंसेवक

असल में, सोशल मीडिया पर जो वीडियो घूम रहा है, उसमें दावा किया जा रहा है कि बिना इजाजत आरएसएस के स्वयंसेवकों ने कर्नाटक के सेदम में पथ संचलन किया। लेकिन हकीकत ये है कि वीडियो कर्नाटक का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र का है।

न्यूज की पड़ताल में साफ हो गया कि वायरल दावा गलत है। जो वीडियो घूम रहा है, वो करीब छह महीने पुराना है और महाराष्ट्र का है। लोग इस पुराने वीडियो को सोशल मीडिया पर गलत दावे के साथ फैला रहे हैं। दूसरी तरफ, कर्नाटक के सेदम में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने बिना सरकारी अनुमति के मार्च निकाला था, जिस पर बाद में पुलिस ने कार्रवाई की थी।

क्या वायरल हो रहा है  

फेसबुक पर ‘राजू सिंह भाई जी’ नाम के यूजर ने 20 अक्टूबर 2025 को एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने कैप्शन लिखा, “कर्नाटक के Sedam में 1,500 RSS स्वयंसेवकों ने बिना अनुमति पथ संचलन निकाला। जय मां भारती।”

पड़ताल

अब, इस वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है, ये जानने के लिए हमने वीडियो के कुछ कीफ्रेम निकाले और गूगल रिवर्स इमेज से खोजा। हमें इसी वीडियो से जुड़ी एक रिपोर्ट ‘Jai Maharashtra News’ नाम के यूट्यूब चैनल पर मिली। ये वीडियो 25 मई 2025 को अपलोड हुआ था। मराठी में दी गई जानकारी के मुताबिक, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने नागपुर में कार्यकर्ता विकास वर्ग का आयोजन किया था। ये आयोजन शहर के मुख्य चौक पर हुआ। इसमें देशभर से छात्र आए थे। 25 दिन चले इस प्रशिक्षण शिविर में 840 स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया था।”

मिली जानकारी के बाद हमने गूगल पर कुछ कीवर्ड्स डालकर सर्च किया। इसी दौरान वायरल वीडियो न्यूज एजेंसी एएनआई के ऑफिशियल एक्स अकाउंट पर मिल गया। ये वीडियो 25 मई 2025 को शेयर हुआ था। वहां बताया गया है कि यह नागपुर में निकाले गए ‘पथ संचलन’ मार्च का है। आप भी स्क्रीन पर इसे देख सकते हैं।

 जांच के दौरान हमें वायरल वीडियो से जुड़ी कुछ तस्वीरें ‘Friends of RSS’ नाम के एक्स अकाउंट पर दिखीं। ये अकाउंट आरएसएस के एक स्वयंसेवक का है। उसने ये तस्वीरें 26 मई 2025 को पोस्ट की थीं। जानकारी के हिसाब से, नागपुर में 25 दिन का आरएसएस कैडर ट्रेनिंग कैंप हुआ था। इसमें भारत भर से करीब 840 स्वयंसेवक पहुंचे थे।

वीडियो ध्यान से देखने पर पता चलता है कि दुकानों पर ‘माफिया’ और ‘हिटलर’ लिखा है। हमने गूगल मैप पर यह जगह ढूंढी और हूबहू वही लोकेशन की तस्वीरें मिल गईं। वायरल वीडियो में जो जगह दिख रही है, वो नागपुर का तिरंगा चौक है। 

द हिंदू की वेबसाइट पर 19 अक्टूबर 2025 को छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की मंजूरी न मिलने के बावजूद आरएसएस ने कर्नाटक के सेदम में मार्च निकाला। इसके बाद पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन बाद में सबको छोड़ दिया।

अधिक जानकारी जानने के लिए हमने मिड-डे महाराष्ट्र के सीनियर रिपोर्टर समीउल्लाह खान से बात की। उन्होंने बताया कि ये वीडियो नागपुर का है और काफी पुराना भी है।


आखिर में हमने उस यूजर का अकाउंट देखा, जिसने ये वीडियो भ्रामक दावे के साथ शेयर किया था। उसके करीब 23 हजार फॉलोअर्स हैं। इसके बाद हमने और भी चीजें नोटिस कीं, और यही सामने आया।

आरएसएस के मार्च का जो वीडियो वायरल हो रहा है, वो असल में छह महीने पुराना है और महाराष्ट्र का है। लोग इसे अब सोशल मीडिया पर गलत दावे के साथ फैला रहे हैं। असली मामला ये है कि कर्नाटक के सेदम में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने सरकार की इजाजत के बिना मार्च निकाला था, जिस पर बाद में पुलिस ने कार्रवाई भी की थी।

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