बस से उठाया, ड्रग केस में फंसाया! CCTV ने खोला पुलिस की गंदी करतूत का पूरा सच
इस केस में जल्दी ही टीआई राजेंद्र पंवार, एसआई संजय प्रताप, एसआई साजिद मंसूरी, कॉन्स्टेबल नरेंद्र सिंह, कॉन्स्टेबल जितेंद्र सिंह और कॉन्स्टेबल दिलीप जाट को सस्पेंड कर दिया गया है।
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| मीडिया से घिरे वकील का बयान देते हुए दृश्य |
पूरा मामला क्या है
मध्यप्रदेश पुलिस की "नार्कोटिक्स गिरफ्तारी" ने उन्हें उल्टा फसा दिया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि यह फर्जी केस था जिसमें एक 18 साल के निर्दोष लड़के को गिरफ्तार किया गया था। मंदसौर के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीणा ने हाई कोर्ट को बताया कि ड्रग केस में उनके अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन किया। इस मामले में छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
देश के शीर्ष दस थानों में से एक मल्हारगढ़ थाना है, जहां पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर कानूनों की धज्जियां उड़ाईं गई। मामले में टीआई राजेंद्र पंवार, एसआई संजय प्रताप, एसआई साजिद मंसूरी, कॉन्स्टेबल नरेंद्र सिंह, कॉन्स्टेबल जितेंद्र सिंह और कॉन्स्टेबल दिलीप जाट को निलंबित कर दिया गया है। हाई कोर्ट ने आरोपी युवा को जमानत देकर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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मामला 29 अगस्त 2025 का है, जब राजस्थान के जोधपुर में एक युवा सोहनलाल पर 2 किलो 714 ग्राम अफीम रखने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने बताया कहा था कि 29 अगस्त को शाम 5 बजे युवक को मल्हारगढ़ के श्मशान के सामने बांडा खाल के पास से पकड़ लिया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, युवक के परिजनों ने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में बस के सीसीटीवी फुटेज भेजे, जिसमें सोहनलाल को कुछ लोग पकड़कर ले गये थे। परिजनों का दावा है कि बस के सीसीटीवी मे कोई और नहीं बल्कि फुटेज में पुलिसकर्मी दिखाई दे रहे हैं।
सोहनलाल के अधिवक्ता हिमांशु ठाकुर ने जानकारी दी कि,
सोहनलाल को 5 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने जमानत दी।कोर्ट ने कहा वह होनहार बच्चा है, घटना वाली शाम को 5:00 बजे 2 किलो 700 ग्राम अफीम जब्त किया गया। 12वीं क्लास अभी समाप्त हुई है। इन सब को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने एसपी मंदसौर को 9 दिसंबर 2025 को उपस्थित होने का आदेश दिया, क्योंकि बस में उसे किडनैप करके ले जाया गया था। "
उन्होंने आगे कहा,
कोर्ट में एसपी महोदय विनोद कुमार मीणा ने स्वीकार किया कि मल्हारगढ़ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई नियमों के खिलाफ थी और गैरकानूनी थी। साथ ही माननीय न्यायालय से पूछा गया कि आपके जांच अधिकारी संजय प्रताप सिंह ने कोर्ट को बताया था कि बस में चढ़ने वाले लोगों को वे नहीं जानते थे और वे पुलिसकर्मी नहीं थे। इस पर एसपी साहब ने स्वीकार किया कि बस में चढ़ने वाले सिर्फ पुलिसकर्मी हैं और वे मल्हारगढ़ पुलिस के कांस्टेबल हैं। "
मामले में एसपी मंदसौर ने कोर्ट को बताया कि आरोपी सभी पुलिसवालो को निलंबित किया गया हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, फुटेज में स्पष्ट रूप से दिखाया गया है कि एक युवक को पुलिसवाले सिविल ड्रेस में बस से उतार रहे है, जबकि केस में पुलिस ने उसे मल्हारगढ़ से श्मशान के सामने बांडा खाल के पास गिरफ्तार करने का दावा किया था।

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