इस्लामिक नाटो की तैयारी? तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब का इजरायल के खिलाफ नया सैन्य गठबंधन

मिडिल ईस्ट में इजरायल की बढ़ती सैन्य दखलअंदाजी और अमेरिका के खुले समर्थन के बाद मुस्लिम देशों में अब एक नई रणनीति पर काम तेज़ होता दिख रहा है। 

इजरायल और अमेरिका की रणनीति के बीच मुस्लिम देशों का सैन्य गठबंधन

रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब मिलकर एक ऐसे सैन्य गठबंधन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिसे अनौपचारिक तौर पर ‘इस्लामिक नाटो’ कहा जा रहा है।

कतर पर हमले के बाद तेज़ हुई थी चर्चा

पिछले साल हमास लीडरशिप को निशाना बनाने के नाम पर कतर पर इजरायल के हमले के बाद मुस्लिम देशों में यह सोच और मजबूत हुई कि इजरायल पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता। इसके बाद से ही एक साझा इस्लामी सैन्य संगठन बनाने की चर्चा तेज़ हो गई थी।

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई कई बार कह चुके हैं कि मुस्लिम देशों का एक स्वतंत्र सैन्य संगठन होना चाहिए, जो मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल को खुली चुनौती दे सके।

2025 में सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता हुआ था

सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने 2025 में एक अहम रक्षा समझौता किया था, जिसके तहत यदि इन दोनों में से किसी एक पर हमला होता है, तो उसे दोनों पर हमला माना जाएगा।

कतर पर इजरायल के हमले के बाद सऊदी अरब को यह एहसास हुआ कि उसे न्यूक्लियर सुरक्षा छतरी की जरूरत है, और इसी वजह से पाकिस्तान के साथ यह समझौता तेजी से किया गया।

तुर्की की एंट्री से दुनियाभर के देशों की नज़रे मुस्लिम देशों पर

अब इस संभावित गठबंधन में तुर्की की एंट्री की खबरें सामने आ रही हैं। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच लगातार बातचीत चल रही है।

इस गठबंधन की संभावना इसलिए भी मजबूत मानी जा रही है क्योंकि वेस्ट एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में तीनों देशों के रणनीतिक हित आपस में मेल खाते हैं।

नाटो का सदस्य होने के बावजूद तुर्की की अलग सोच

तुर्की सिर्फ एक क्षेत्रीय ताकत नहीं है, बल्कि वह अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो (NATO) का भी सदस्य है। अमेरिका के बाद नाटो में दूसरी सबसे बड़ी सेना तुर्की की मानी जाती है।

ये भी पढ़े – ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में 62 लोगों की मौत, ईरान के क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से मांगी मदद।

इसके बावजूद इजरायल को लेकर तुर्की और सऊदी अरब की अमेरिका से अक्सर तनातनी बनी रहती है, क्योंकि वे जानते हैं कि हालात चाहे जैसे भी हों, अमेरिका आखिर में इजरायल के साथ ही खड़ा रहेगा।

पहले से मजबूत हैं पाकिस्तान-तुर्की रक्षा रिश्ते

• तुर्की पाकिस्तान के लिए नेवी के युद्धपोत बना रहा है

• पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों को तुर्की ने एडवांस किया है

• तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ मिलकर ड्रोन टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रहा है

ईरान को लेकर साझा रणनीति

हालांकि सऊदी अरब और तुर्की, ईरान को लेकर सतर्क रहे हैं, लेकिन सैन्य टकराव के बजाय वे ईरानी इस्लामी क्रांति के खिलाफ खुलकर खड़े होने से बचते रहे हैं।

सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद तुर्की और ईरान के रिश्तों में खटास जरूर आई, लेकिन इजरायल विरोध के मुद्दे पर तीनों देश कई बार एक ही लाइन में नजर आते हैं।

अगर बना ‘इस्लामिक नाटो’, तो किसका क्या रोल?

अगर यह इस्लामी सैन्य गठबंधन बनता है, तो तीनों देशों की भूमिका साफ मानी जा रही है

• सऊदी अरब: आर्थिक ताकत और फंडिंग

• पाकिस्तान: न्यूक्लियर क्षमता, बैलिस्टिक मिसाइल और मैनपावर

• तुर्की: आधुनिक हथियार, डिफेंस सिस्टम और सैन्य एक्सपर्टीज

क्या बदल जाएगा मिडिल ईस्ट का पावर बैलेंस?

अगर तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब का यह गठबंधन औपचारिक रूप लेता है, तो यह मिडिल ईस्ट की राजनीति और सुरक्षा समीकरण को पूरी तरह बदल सकता है। इजरायल और अमेरिका के लिए यह एक बड़ी रणनीतिक चुनौती साबित हो सकती है।


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