दलित महिला का चौराहे पर अंतिम संस्कार, परिजनों को श्मशान घाट में जाने से रोका
बिहार के वैशाली जिले से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक महादलित परिवार को अपनी बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार सड़क पर करने के लिए मजबूर होना पड़ा। आरोप है कि गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने अंतिम यात्रा को श्मशान घाट तक जाने से रोक दिया।
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| परिजन बीच सड़क पर ही अंतिम संस्कार करते हुए (फोटो X) |
पूरा मामला क्या है।
यह घटना गोरौल थाना क्षेत्र के सोंधो-वासुदेव गांव की बताई जा रही है। 91 वर्षीय झपसी देवी का निधन बुधवार, 28 जनवरी की रात हुआ था। अगले दिन गुरुवार को जब परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जा रहे थे, तभी रास्ते में कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर रास्ता बंद कर दिया।
बताया जा रहा है कि श्मशान घाट की ओर जाने वाला मार्ग पहले से ही अवैध निर्माण के कारण अवरुद्ध था। ऐसे में परिवार के पास कोई विकल्प नहीं बचा और मजबूरी में गांव वालों ने बीच सड़क पर ही पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया।
इलाके में फैला तनाव, पुलिस पहुंची मौके पर
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
प्रशासन ने किया गांव का दौरा
शुक्रवार, 30 जनवरी को जिलाधिकारी वर्षा सिंह और पुलिस अधीक्षक विक्रम सिहाग ने टीम के साथ गांव का दौरा कर हालात का जायजा लिया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि श्मशान घाट के रास्ते में कंक्रीट की दुकानें और एक मंदिर बने हुए हैं, जिसके कारण रास्ता पूरी तरह से बाधित है।
जांच के आदेश, अतिक्रमण हटाने पर विचार
प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की है। अधिकारियों के अनुसार, यह अतिक्रमण पिछले 8 से 10 वर्षों से मौजूद है और स्थायी समाधान के लिए अवैध निर्माण हटाने पर विचार किया जा रहा है।
बिहार के वैशाली जिले में एक महादलित परिवार को अपनी बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार के लिए शमशान जाने का रास्ता नहीं मिला तो उन्होंने मजबूरी में सड़क के चौराहे पर ही शव का दाह संस्कार कर दिया। pic.twitter.com/knYO1ac1i3
— छपरा जिला 🇮🇳 (@ChapraZila) January 31, 2026
परिवार वालों का छलका दर्द
मृतका के बेटे संजीत मांझी ने मीडिया से बातचीत में कहा,
"कि जब उन्हें आगे बढ़ने से रोका गया तो ग्रामीणों ने वहीं सड़क पर अंतिम संस्कार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उनके पास इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं था"
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अंतिम यात्रा में शामिल मेवालाल मांझी ने कहा कि वे बेहद गरीब हैं, उनके पास न घर है, न जमीन और अब तो अपने मृत परिजनों का अंतिम संस्कार करने का अधिकार भी उनसे छीना जा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना पर लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने भी चिंता जताई है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेश भट्ट ने कहा कि पुलिस प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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