सूरजकुंड हादसा मे रिटायरमेंट से पहले इंस्पेक्टर की मौत, SIT जांच के बाद 2 आरोपी गिरफ्तार

फरीदाबाद: अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले की खूबसूरती उस वक्त मातम में बदल गई जब एक झूले ने न केवल कई परिवारों की खुशियां छीन लीं, बल्कि समाज को सुरक्षा के एक गंभीर मोड़ पर खड़ा कर दिया। इस दिलदहला देने वाले हादसे में एक जांबाज पुलिस अधिकारी, इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद ने दूसरों की जान बचाते हुए अपनी जान दे दी है। यह घटना केवल एक तकनीकी विफलता नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिकों के जीवन के अधिकार पर सवाल खड़ा करती है।

सूरजकुंड मेला झूला हादसे  की तस्वीर (फोटो / सोशल मीडिया)

सेवा के 36 साल और अंतिम बलिदान

इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद (58) कोई साधारण नाम नहीं थे। उन्होंने साल 1989 में हरियाणा आर्म्ड पुलिस से अपना सफर शुरू किया था। 36 साल की लंबी और बेदाग सेवा के बाद, मार्च 2026 में उनका रिटायरमेंट होना ही था। उनके सीने पर 2019-20 में राज्यपाल द्वारा दिया गया 'पुलिस मेडल' उनकी कार्य क्षमता की गवाही देता था।

7 फरवरी की शाम, जब सूरजकुंड मेले में झूला टूटा, तो जगदीश प्रसाद ने सुरक्षित दूरी बनाने के बजाय खतरे की ओर दौड़ लगाई। वे झूले में फंसे 19 लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे थे, तभी ढांचे का दूसरा हिस्सा उन पर गिर गया। एक महीने बाद सेवामुक्त होकर घर लौटने वाले पिता और पति की जगह, उनके घर अब उनकी शहादत की खबर पहुंची है। उनके पीछे पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है, जो अभी पढ़ाई कर रहे हैं।

क्या नागरिक सुरक्षा प्राथमिकता है?

इस हादसे को केवल 'दुर्घटना' मान लेना मानवाधिकारों की अनदेखी होगी। मानव अधिकार (Human Rights) के सिद्धांतों के अनुसार, प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित वातावरण और सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा का मौलिक अधिकार है।

जब व्यापारी व्यापार लाभ के लिए झूलों का संचालन करते हैं, तो उनकी प्राथमिकता सुरक्षा मानक (Safety Standards) होने चाहिए। पूर्व में 2002 और 2019 में हुए घातक हादसों के बावजूद झूलों को फिर से अनुमति देना दर्शाता है कि आर्थिक लाभ के आगे जीवन के अधिकार को गलत समझा गया।

पुलिस और सुरक्षा कर्मी जनता की रक्षा के लिए तैनात होते हैं, लेकिन उन्हें असुरक्षित उपकरणों और बिना किसी ठोस बैकअप के जोखिम में डालना उनके कार्यस्थल सुरक्षा के अधिकारों का उल्लंघन है।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

हादसे की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई की है। इस मामले में अब तक दो मुख्य आरोपियों 'हिमाचल फन केयर' के मालिक शाकिर मोहम्मद और मेरठ के रहने वाले नितेश को गिरफ्तार किया गया है। घटना की तह तक जाने के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसकी कमान फरीदाबाद के ACP क्राइम, वरुण कुमार दहिया संभाल रहे हैं।

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हरियाणा के पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने बताया कि,

“हादसे में घायल 11 लोग अब खतरे से बाहर हैं। वहीं, हरियाणा के DGP अजय सिंघल ने दिवंगत इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद को 'शहीद' का दर्जा देने और उनके परिवार को 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि देने का ऐलान किया है।’’

सूरजकुंड मेले का इतिहास गवाह है कि सुरक्षा के साथ बार-बार खिलवाड़ हुआ है। साल 2002 में हुई मौत के बाद झूलों पर लंबे समय तक प्रतिबंध रहा, लेकिन कुछ समय बाद व्यापारिक हितों के कारण इन्हें फिर शुरू कर दिया गया। 2019 की घटना के बाद भी सबक नहीं लिया गया। बार-बार होने वाले ये हादसे यह सोचने पर मजबूर करते हैं।

“रिपोर्ट को विश्वसनीय स्रोतों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।’’

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